चंद्रपुर जिले में वन अधिकार दावों को लेकर बड़ा विवाद ..!

चंद्रपुर जिले में वन अधिकार दावों को लेकर बड़ा विवाद, 69 आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी का आरोप .!
बिना नोटिस और सुनवाई के वन अधिकार दावे खारिज करने का मामला; संतोष पारखी ने 11 दावेदारों की ओर से जिलाधिकारी के समक्ष दाखिल की अपील .!
चंद्रपुर (वि.प्र.) :  चंद्रपुर जिले में व्यक्तिगत वन अधिकार दावों को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। चोरगांव, वरवट, निंबाला, कोळसा सहित 13 गांवों के 69 आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के व्यक्तिगत वन अधिकार दावों को उपविभागीय वन अधिकार समिति (एसडीएलसी) द्वारा बिना सुनवाई और पूर्व सूचना के खारिज किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
इस मामले में शिवसेना चंद्रपुर तालुका प्रमुख, शिवसेना भारतीय कामगार संघ के चंद्रपुर जिलाध्यक्ष तथा जिला ग्राहक संरक्षण समिति के अध्यक्ष संतोष लिलाबाई दशरथ पारखी ने 11 वनभूमि धारकों की ओर से जिला स्तरीय वन अधिकार समिति एवं जिलाधिकारी, चंद्रपुर के समक्ष आधिकारिक अपील दाखिल की है। इस दौरान उन्होंने सहायक अधीक्षक (भूमि) से मुलाकात कर मामले पर चर्चा भी की।

समिति के गठन पर उठाए सवाल .!

संतोष पारखी ने उपविभागीय वन अधिकार समिति की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में जनवरी 2020 के बाद जिला परिषद एवं पंचायत समिति के चुनाव नहीं हुए हैं तथा 21 मार्च 2022 से जिला परिषद में प्रशासक व्यवस्था लागू है। उनके अनुसार, वन अधिकार नियम 2008 के नियम 5 के तहत समिति में जिला परिषद द्वारा नामित तीन गैर-सरकारी सदस्यों का होना आवश्यक है, जिनमें दो अनुसूचित जनजाति के सदस्य और एक महिला सदस्य शामिल हों।
उन्होंने दावा किया कि प्रशासक को इन सदस्यों की नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में 13 अगस्त 2026 को आयोजित उपविभागीय वन अधिकार समिति की बैठक की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस बैठक तथा उसके आधार पर लिए गए निर्णयों की जांच करने की मांग की है।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप .!

मामले का दूसरा गंभीर पहलू सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से जुड़ा है। पारखी के अनुसार, वन अधिकारों से संबंधित याचिका WP(C) 109/2008 में सर्वोच्च न्यायालय ने दावों के अंतिम निपटारे तक वन निवासियों को बेदखल नहीं करने के संबंध में आदेश दिया है।
इसके बावजूद, दावे लंबित रहने के दौरान वन विभाग द्वारा जेसीबी मशीनों का उपयोग कर किसानों की फसलें नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उपविभागीय अधिकारी, चंद्रपुर ने भी पत्र क्रमांक 1114/2026 के माध्यम से वन विभाग से जवाब मांगा है। अपीलकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है।

बिना सुनवाई के दावे खारिज करने पर आपत्ति .!

अपीलकर्ताओं का आरोप है कि वन अधिकार दावों को खारिज करने से पहले किसी भी दावेदार को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया और न ही कोई नोटिस जारी किया गया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
उन्होंने मांग की है कि सभी संबंधित दावों की दोबारा सुनवाई की जाए तथा प्रभावित वनभूमि धारकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।

‘न्याय नहीं मिला तो उच्च न्यायालय जाएंगे’ — संतोष पारखी

संतोष पारखी ने कहा, “जब जिला परिषद में निर्वाचित व्यवस्था नहीं है, तो उपविभागीय वन अधिकार समिति के गठन और उसके निर्णयों की वैधता की जांच होनी चाहिए। 69 गरीब आदिवासी एवं गैर-आदिवासी वनभूमि धारकों के अधिकारों का सवाल है। हमारे दावों को तत्काल पुनः सुनवाई के लिए लिया जाए। यदि न्याय नहीं मिला, तो हम उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।”

11 अपीलकर्ताओं के आवेदन दाखिल, शेष दावेदारों के आवेदन जल्द .!

इस अवसर पर चंद्रपुर उप-तालुका प्रमुख एवं सोशल मीडिया लोकसभा प्रमुख सुयोग अवथरे उपस्थित थे। अपील के साथ 11 वनभूमि धारकों के सहमति पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें सुरेखा खोब्रागड़े, दादाजी खोब्रागड़े, ताराबाई खोब्रागड़े, सुंदराबाई गोडकर (वारिस), नामदेव दुपारे, शामराव कावळे, दिलीप कोकोंडे, सावनाबाई लोनबले, कवडू सिडाम, पुरुषोत्तम लोनबले और विठ्ठल हेडा-येड शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, शेष 61 वनभूमि धारकों की ओर से पूरक आवेदन 15 अक्टूबर 2026 तक दाखिल किए जाने की तैयारी है।
अब इस मामले में जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अपीलकर्ताओं ने मांग की है कि समिति के गठन, दावों को खारिज करने की प्रक्रिया तथा किसानों की फसलों को हुए नुकसान की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। हालांकि, लगाए गए आरोपों और समिति की वैधता से जुड़े दावों पर संबंधित प्रशासन एवं वन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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