महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 में बढ़ी फीस का विरोध, मुख्यमंत्री से नियम वापस लेने की मांग .!
चंद्रपुर (वि.प्र.) : महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून 2026 से लागू किए गए “महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026” के खिलाफ अब विरोध तेज होता नजर आ रहा है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता फेडरेशन ने इन नए नियमों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव तथा जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
फेडरेशन का कहना है कि नए नियमों के कारण सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच रहा है। संगठन का आरोप है कि यह बदलाव आम नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार को सीमित करेगा और पारदर्शिता पर असर डालेगा।
फेडरेशन के चंद्रपुर जिलाध्यक्ष हिमायूं इसराइल अली के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया है। वहीं प्रथम अपील शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और द्वितीय अपील शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा सूचना की प्रति के लिए प्रति पृष्ठ शुल्क 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दिया गया है, जिस पर संगठन ने कड़ा विरोध जताया है।
नए नियमों की कुछ अन्य शर्तों पर भी आपत्ति दर्ज की गई है। अब सूचना मांगते समय कारण बताना और नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे फेडरेशन ने RTI अधिनियम 2005 की धारा 6(2) के खिलाफ बताया है। संगठन के अनुसार ये प्रावधान मूल कानून के विपरीत हैं और “अल्ट्रा वायर्स” (Ultra Vires) की श्रेणी में आते हैं।
इसके अलावा दस्तावेजों के निरीक्षण शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां एक घंटे तक निरीक्षण मुफ्त था और उसके बाद प्रति घंटे 5 रुपये शुल्क लिया जाता था, वहीं अब पहले घंटे के बाद प्रति घंटे 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए भी प्रति पृष्ठ 5 रुपये शुल्क तय किया गया है। फेडरेशन का कहना है कि इससे गरीब, किसान, मजदूर, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सूचना प्राप्त करना और अधिक कठिन हो जाएगा।
फेडरेशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि बढ़ी हुई फीस और विवादास्पद प्रावधानों को तुरंत रद्द कर पहले की सरल और जनहितकारी व्यवस्था बहाल की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र को मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, इसलिए इसके उपयोग में बाधा डालने वाले नियमों को हटाना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपते समय चंद्रपुर शहराध्यक्ष हाजी अली सहित रामजी हरणे, ललित पडोळे, अर्शीत झाड़े, महेश गोरे, शिल्पा कांबले, मनीष खापरे, सिद्धार्थ शेगांवकर और शैलेश शेंडे उपस्थित थे।
