गुमनामी का सामना कर रहें अभिनेता शफीक सैयद जिन्हे राष्ट्रपति से नेशनल अवार्ड मिल चुका है .!
मुंबई ( ब्यूरो ) : मीरा नायर की 1988 में आई ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म 'सलाम बॉम्बे' के मुख्य बाल कलाकार शफीक सैयद आज बेंगलुरु में ऑटो रिक्शा चलाकर अपना परिवार पाल रहे हैं। 1980 में घर से भागकर मुंबई आए! शफीक सड़क पर रहते थे ! जहां मीरा नायर ने उन्हें अपनी फिल्म के लिए चुना था। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 'नेशनल फिल्म अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था। इस सफलता के बावजूद शफीक को बॉलीवुड में पर्याप्त काम नहीं मिला। कुछ समय बाद उन्हें 'पतंग' फिल्म और 2015 में एक कन्नड़ फिल्म 'केयर ऑफ फुटपाथ 2' में काम मिला, लेकिन ज्यादातर जगहों से उन्हें रिजेक्शन ही मिला। लगातार काम न मिलने से निराश होकर वे बेंगलुरु लौट गए और ऑटो रिक्शा चलाने लगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब वे ऑटो चलाकर प्रतिदिन लगभग 150 रुपये कमाते हैं और उनका पूरा परिवार उन्हीं पर आश्रित है। आर्थिक तंगी और संघर्ष से परेशान होकर उन्होंने दो बार आत्महत्या की कोशिश भी की थी। एक समय में राष्ट्रपति से सम्मानित यह अभिनेता आज गुमनामी का सामना कर रहा है।