मुंबई ( गिरजा शंकर अग्रवाल ) - संगीत निर्देशक डी. एन. शास्त्री ने बताया कि वह पेशे से वे एक व्यवसायी हैं, लेकिन संगीत हमेशा से उनका सच्चा जुनून रहा है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उनका सफर गणेश सर के मार्गदर्शन में शुरू हुआ, और फिर अहमद सर के साथ उन्होंने शास्त्रीय संगीत और ग़ज़ल गायकी को और गहराई से समझा। अभी वे कोलकाता के गुरु श्री सुवोदीप मुखर्जी जी से सीख रहे हैं, जिनकी देखरेख में उनका संगीत का सफर आगे बढ़ रहा है। एक गायक के तौर पर उनकी सबसे बड़ी खूबी ग़ज़ल गायकी है। हाल के वर्षों में, वे ग़ज़लों के लिए ओरिजिनल धुनें बनाने में बहुत रुचि लेने लगे हैं, जिसमें वे शास्त्रीय बारीकियों को दिल से निकले भावों के साथ मिलाते हैं।उन्हें इस बात का बहुत गर्व है कि 25 जुलाई को मुंबई के 'द ललित' में उन्हें टी -सीरीज़ पर हाल ही में रिलीज़ हुई उनकी ग़ज़ल " उसको पाकर " के लिए सम्मानित किया गया। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जो उन्हें और भी ज़्यादा ईमानदारी और लगन के साथ संगीत के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित करती है। गीतकार मिर्ज़ा अली नवाज़, मिलिंद गोवेकर, ग़ज़ल उस्ताद चंदन दास जी और कमल घिमिरे का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने बॉलीवुड में उनके सपने को सच किया।
बिजनेस मेरा पेशा है, लेकिन संगीत मेरी आत्मा हैँ - डी. एन. शास्त्री
byChandikaexpress
-
0
