आखिर कब होगा विकास? गांधी स्मारक गार्डन की दुर्दशा पर उठे सवाल, नगर परिषद की कार्रवाई पर जनता नाराज़ ..!
सफाई और सुरक्षा के अभाव में गार्डन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा - पालतू कुत्तों के आतंक से नागरिकों में भय, प्रभाग क्रमांक 15 के जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह .!
बल्लारपुर (का.प्र.) : शहर के बस्ती विभाग स्थित गांधी स्मारक गार्डन की बदहाल स्थिति ने नगर परिषद बल्लारपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी नागरिकों के स्वास्थ्य और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र रहा यह गार्डन आज दुर्व्यवस्था, गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बन गया है। गार्डन में व्यायाम के लिए लगाए गए उपकरण जर्जर अवस्था में पड़े हैं, वहीं नियमित साफ-सफाई के अभाव में पूरा परिसर अपनी बदहाली की कहानी स्वयं बयां कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, गार्डन में सुबह से लेकर देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां खुलेआम मूत्र विसर्जन, शराब सेवन और जुआ खेलने जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जिससे परिसर का वातावरण दूषित और अशोभनीय बन गया है। इस स्थिति के कारण परिवार, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक गार्डन में आने से कतराने लगे हैं।
इसके अलावा, क्षेत्र में पालतू कुत्तों के बढ़ते आतंक ने नागरिकों की परेशानी और बढ़ा दी है। राह चलते लोगों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे आमजन में भय का माहौल है। नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विशेष बात यह है कि इस क्षेत्र के प्रभाग क्रमांक 15 में तीन नगर सेवक मौजूद हैं, इसके बावजूद गार्डन की दुर्दशा और नागरिकों की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं जाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
नागरिकों ने नगर परिषद बल्लारपुर के मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष एवं स्वास्थ्य सभापति की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित हैं और वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन से गांधी स्मारक गार्डन की नियमित साफ-सफाई, व्यायाम उपकरणों की मरम्मत, असामाजिक गतिविधियों पर रोक तथा पालतू और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान हेतु तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि नगर परिषद बल्लारपुर प्रशासन जनता की इन गंभीर समस्याओं को कब तक नजरअंदाज करता रहेगा और कब इस गार्डन को उसकी पूर्व स्थिति में बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, नागरिकों के मन में यही सवाल गूंज रहा है — आखिर कब होगा विकास?
