चंद्रपुर में सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल .!

भाजपा और शिवसेना (ठाकरे गुट) की संभावित नई सियासी जुगलबंदी .!

बल्लारपुर (का.प्र.) : चंद्रपुर महानगरपालिका के महापौर पद को लेकर शहर की राजनीति इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान के बाद भले ही विवादों का एक अध्याय समाप्त हुआ हो, लेकिन बहुमत के अभाव में महापौर पद किसके हाथ जाएगा, यह सवाल अब भी जस का तस बना हुआ है।
इसी राजनीतिक पेच के बीच अब एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार शिवसेना (ठाकरे गुट) और भारतीय जनता पार्टी के बीच नागपुर में एक गुप्त बैठक हुई है। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा शिवसेना (ठाकरे गुट) के जिला प्रमुख संदीप गिर्ह की मौजूदगी बताई जा रही है।

सत्ता बंटवारे पर बनी सहमति :

सूत्रों का दावा है कि इस अहम बैठक में सत्ता गठन और महापौर पद के सत्ता-वाटप फार्मूले पर सकारात्मक चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है और आगामी दो दिनों में भाजपा तथा शिवसेना (ठाकरे गुट) संयुक्त रूप से एक आधिकारिक पत्रकार परिषद कर इस फार्मूले का सार्वजनिक ऐलान कर सकते हैं।

कांग्रेस की अंदरूनी कलह बनी वजह? 

पिछले करीब 15 दिनों से कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कुरघोड़ियां चरम पर थीं। पार्टी के ही नेता एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए और नगरसेवकों की खुलेआम “पळवापळवी” (खिंचातानी) शुरू हो गई। सत्ता स्थापित करने के लिए जहां मित्र दलों के साथ संवाद आवश्यक था, वहीं कांग्रेस नेतृत्व आपसी वर्चस्व की लड़ाई में उलझा रहा। नतीजतन महानगरपालिका में सत्ता गठन का मौका कांग्रेस के हाथ से फिसलता नजर आने लगा।

विकास के नाम पर नई सियासत?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्य और केंद्र में भाजपा की सत्ता को देखते हुए चंद्रपुर शहर के विकास को गति देने के लिए भाजपा और शिवसेना (ठाकरे गुट) एक साथ आने का रास्ता चुन सकती हैं। प्रस्तावित फार्मूले के अनुसार पहले ढाई वर्ष शिवसेना (ठाकरे गुट) का महापौर होगा, जबकि अगले ढाई वर्ष मित्रपक्ष भाजपा को यह पद मिल सकता है।

जनता वार्डों में, नेता होटलों में :

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह भी आरोप लग रहे हैं कि जहां एक ओर आम जनता मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, वहीं सत्ता की जोड़-तोड़ में नगरसेवकों की “होटलवारी” चल रही है। प्रभागों की समस्याएं फिलहाल हाशिये पर जाती दिखाई दे रही हैं।

आने वाले दो दिन निर्णायक :

यदि सूत्रों की मानें तो अगले 48 घंटे चंद्रपुर की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। भाजपा और शिवसेना (ठाकरे गुट) की यह संभावित युति अगर औपचारिक रूप लेती है, तो यह न केवल महानगरपालिका की सत्ता का गणित बदलेगी, बल्कि स्थानीय राजनीति में इसे एक बड़ा राजनीतिक भूचाल माना जाएगा।
अब सबकी निगाहें दोनों दलों की संभावित संयुक्त पत्रकार परिषद पर टिकी हैं, जहां चंद्रपुर की सत्ता का भविष्य तय होने वाला है।

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