नगरपालिका की लापरवाही या भ्रष्टाचार?
बल्लारपुर में शव फ्रिजर व्यवस्था पर गंभीर सवाल .!
बल्लारपुर (का.प्र.) : करीब एक लाख की आबादी वाले बल्लारपुर शहर में नगरपालिका प्रशासन की घोर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। मौत जैसे संवेदनशील और दुखद समय में अत्यंत आवश्यक मानी जाने वाली ‘शव फ्रिजर’ सुविधा नगरपालिका के पास होते हुए भी आम नागरिकों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका के पास कुल 4 शव फ्रिजर मौजूद हैं, लेकिन एक भी चालू हालत में नहीं है। सभी फ्रिजर वर्षों से धूल खा रहे हैं।
इसके विपरीत, शहर के गुरुद्वारा और साईं मंदिर में उपलब्ध शव फ्रिजर पूरे साल बिना किसी रुकावट के सेवा दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब धार्मिक संस्थानों के फ्रिजर कभी खराब नहीं होते, और यदि होते भी हैं तो तत्काल उनकी मरम्मत हो जाती है, तो नगरपालिका के फ्रिजर बार-बार खराब क्यों हो जाते हैं?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि “मरम्मत” के नाम पर हर साल हजारों रुपये का खर्च कागजों पर दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविकता में सुविधा शुरू ही नहीं होती। इससे यह संदेह और गहराता है कि आखिर इन मरम्मत खर्चों का लाभ किसे मिल रहा है? क्या यह सिर्फ प्रशासनिक निष्क्रियता है या फिर सुनियोजित भ्रष्टाचार?
शहर में अब निर्वाचित नगरसेवक मौजूद हैं, इसके बावजूद यदि जनता को बुनियादी मानवीय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। गर्मी का मौसम सिर पर है, और ऐसे समय में शव फ्रिजर की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नगरपालिका प्रशासन तत्काल नींद से जागे, सभी शव फ्रिजरों की सही तरीके से मरम्मत कर उन्हें तुरंत चालू किया जाए, ताकि शोकाकुल परिवारों को कम से कम इस बुनियादी सुविधा के लिए भटकना न पड़े।
अब देखना यह है कि क्या नगरपालिका इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्रवाई करेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों और आश्वासनों में ही दबकर रह जाएगा।
