जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की उपेक्षा पर सवाल .!

जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की उपेक्षा पर सवाल, महिला प्रगणकों की सुरक्षा को लेकर चिंता .!
शिक्षणाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग, शिक्षक प्रतिनिधियों से आवाज उठाने की अपील .!
नागपुर (वि.प्र.) : क्षेत्र में जनगणना कार्य एवं शैक्षणिक प्रशासन से जुड़े कार्यों को लेकर शिक्षकों में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मा. शिक्षणाधिकारी महोदय द्वारा समय-समय पर शालाओं से विभिन्न प्रकार की जानकारी भेजने के निर्देश दिए जाते हैं। साथ ही कई बार यह शर्त भी रखी जाती है कि निर्धारित समय पर जानकारी न भेजने पर संबंधित देयकों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में एक गंभीर विसंगति सामने आई है। जो शालाएं ईमानदारी से समय पर जानकारी भेजती हैं, उनके सभी शिक्षकों को ऐसे अतिरिक्त कार्यों में पूर्ण रूप से लगाया जाता है। वहीं, जो संस्थाएं जानकारी भेजने में लापरवाही बरतती हैं, वे इस दबाव से बच जाती हैं। इस स्थिति से कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों में असंतोष पनप रहा है।
हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि उन्हें कार्य करने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी समस्याओं का संज्ञान नहीं लिया जाना चिंता का विषय है। विशेष रूप से जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कार्य में बड़ी संख्या में महिला प्रगणक भी शामिल हैं, जिन्हें फील्ड में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
महिला प्रगणकों ने सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि घर-घर जाकर जनगणना करना जोखिम भरा कार्य है, फिर भी उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध नहीं कराया जाता। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी अपने पेशे के प्रति समर्पित और गौरवान्वित होता है। जब कोई कर्मचारी देशहित में कार्य कर रहा हो, तो उसके साथ संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार अपेक्षित होता है। यदि इसके विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
इस संदर्भ में शिक्षकों ने अपील की है कि यदि किसी के साथ अनुचित व्यवहार होता है, तो वह डरने के बजाय अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने और आपातकालीन सेवा नंबर 112 पर संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।
अंत में शिक्षकों ने मा. शिक्षणाधिकारी महोदय से इस पूरे मामले में गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है। साथ ही मा. शिक्षक आमदार महोदय से भी अनुरोध किया गया है कि वे इस विषय को प्रमुखता से उठाकर शिक्षकों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।

Post a Comment

Previous Post Next Post
clipboard. ".