“श्वान से परेशानियों का जाल — बल्लारपुर के नागरिक बोले, अब बर्दाश्त नहीं” ..!
बल्लारपुर (का.प्र.) : बल्लारपुर नगर में पिछले कुछ महीनों से आवारा एवं अनियंत्रित श्वान (कुत्ते) समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। इन श्वानों की संख्या तेजी से बढ़ने, उनका गलियों में भटकने और कभी-कभी आवाम पर हमला करने की घटनाओं से नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। श्वान अक्सर सड़कों, गलियों और मुख्य मार्गों पर घूमते रहते हैं, जिससे लोग विशेषकर रात के समय डर के साये में रहने लगे हैं।
कई बच्चे घर से निकलते समय ड़रते हैं, महिलाएं अकेले निकलने को तैयार नहीं होतीं। दर्जनों मामलों में श्वानों ने लोगों को काटने की कोशिश की है; कुछ को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की दृष्टि से यह समस्या संक्रमण और बिमारियों को बढ़ावा देती है। कई बार स्थानीय नागरिकों द्वारा शिकायतें देने के बावजूद नगर पालिका या पशु विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
नागरिकों का दर्द और प्रतिक्रिया :
“दिन में तो मुश्किल से सड़क पार कर पाते हैं, रात को तो निकलना खतरनाक हो गया है,”
“कई बार स्वच्छता अधिकारी और नगर पालिका को कहा, लेकिन आज तक कोई स्थाई हल नहीं मिला।"
प्रशासन और पशु विभाग की भूमिका :
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। पशु विभाग ने बताया कि कई श्वानों को पकड़कर वॅक्सीन और नसबंदी (sterilization) के लिए भेजा जा रहा है। नगर पालिका जीवित श्वान नियंत्रण (Animal Birth Control) नियमों के दायरे में कार्य करने का दावा करती है। लेकिन नागरिकों का आरोप है कि यह कार्रवाई अधूरी और अनियमित है।
विशेषज्ञों की राय :
पशु कल्याण संस्था “प्राणी हित” के प्रतिनिधि ने कहा: “कुत्तों को बिना नसबंदी और टीकाकरण के छोड़ा जाना ही समस्या को और बढ़ाता है। जागरूकता, पुनर्वास शेल्टर और नियमित निरीक्षण जरूरी है।”
नागरिकों की मांगे :
1. संवेदनशील इलाकों में श्वान पकड़ने और सुरक्षित शेल्टर भेजने की व्यवस्था।
2. सभी श्वानों का टीकाकरण और नसबंदी।
3. गलियों व मार्गों पर नियमित गश्त एवं निगरानी।
4. नगर वार्डों में नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी।
5. जन जागरूकता अभियान — लोगों को शिक्षित करना कि कैसे कुत्तों के साथ संतुलित व्यवहार रखें।
6. प्रभावित नागरिकों को प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा, विशेषकर कुत्ते काटने की घटना पर तत्काल इलाज।
अतः बल्लारपुर के नागरिक अब इस तरह की स्थिति को बर्दाश्त नहीं करना चाहते। यदि प्रशासन समय रहते इस समस्या का ठोस निदान नहीं करता है, तो जनाक्रोश, धरना — प्रदर्शन जैसी गतिविधियाँ जन्म ले सकती हैं।
