क्रेसेंट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने न्याय व्यवस्था को करीब से देखा .!

क्रेसेंट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने न्याय व्यवस्था को करीब से देखकर संविधान और न्याय प्रक्रिया की अहमियत को नई दृष्टि से पहचाना.!
बल्लारपुर (का.प्र.) : संविधान दिवस के अवसर पर क्रेसेंट पब्लिक स्कूल बल्लारपूर की ओर से कक्षा चार से नौ के लगभग नब्बे विद्यार्थियों का ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी न्यायालय भ्रमण आयोजित किया गया, जिसने बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को नया आयाम दिया। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस की भावना तथा विद्यालय के मूल सिद्धांत—“कोई मछली तैरने के लिए बाध्य नहीं की जाएगी और कोई पक्षी उड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा”—को चरितार्थ करते हुए अनुभव आधारित शिक्षण को प्रोत्साहन देता है। विद्यालय का स्पष्ट मानना है कि वास्तविक सीख केवल पुस्तकों के पन्नों में सिमटी बातें याद करने से नहीं आती, बल्कि किसी विषय को प्रत्यक्ष देखकर, समझकर और उससे जुड़कर ही बच्चे ज्ञान का सच्चा मूल्य समझते हैं।
प्रातः दस बजे विद्यार्थी पूर्ण अनुशासन के साथ न्यायालय परिसर पहुँचे। प्रवेश से पहले सभी विद्यार्थियों ने निर्धारित सुरक्षा जाँच पूरी की। इसके पश्चात न्यायालय के अधिकारियों ने सभी का आत्मीय स्वागत किया तथा संविधान दिवस का महत्व, न्यायालय की मूल व्यवस्था, न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया और समाज में न्याय की भूमिका के बारे में सहज एवं प्रेरणादायी जानकारी दी। बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि न्यायालय केवल अपराध और दंड से जुड़ी जगह नहीं है, बल्कि यह वह संस्था है जहाँ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाती है और समानता व न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।
इस संक्षिप्त परिचय के बाद विद्यार्थियों को न्यायालय कक्ष का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया, जिसका संचालन यक्षिता और हुमैरा ने सुगमता से किया। विद्यार्थियों ने पहली बार न्यायालय के वास्तविक वातावरण को देखा। न्यायालय कक्ष में उपस्थित गंभीरता, अनुशासन और प्रक्रिया ने बच्चों को अत्यंत प्रभावित किया। उन्हें न्यायाधीश की गरिमा, अधिवक्ता की भूमिका, एक मामले की संपूर्ण प्रक्रिया तथा न्यायालय में अनुसरण किए जाने वाले नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बच्चों ने अपनी जिज्ञासाओं को मन में सँजोते हुए प्रत्येक विवरण को ध्यानपूर्वक समझा।
न्यायालय भ्रमण का सबसे प्रेरक चरण वह था जब विद्यार्थियों के लिए संविधान विषय पर संवादात्मक शिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में विद्यार्थियों ने स्वयं विभिन्न विषय प्रस्तुत कर एक अनोखी मिसाल पेश की। प्रस्तावना का वाचन फैज़ा, मोहन, अनिशा और सोयम ने अत्यंत स्पष्टता और उत्साह से किया। मूलभूत अधिकारों की व्याख्या यशमी और गुंजन ने सहज शब्दों में की, जबकि मूलभूत कर्तव्यों की जानकारी फरहान ने समझाई। महत्वपूर्ण अनुच्छेदों पर प्रकाश सिद्धि ने डाला और लावण्या ने संविधान दिवस मनाने का कारण विस्तृत रूप से प्रस्तुत कर सभी को प्रभावित किया। बच्चों की प्रस्तुतियाँ सरल, अर्थपूर्ण और अत्यंत प्रभावशाली रहीं, जिससे पूरा सत्र जीवंत और संवादात्मक बन गया।
इस अवसर पर माननीय सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) सौ. सलवेशकर महोदया की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। विद्यार्थियों को न्यायाधीश के दायित्व, न्याय में निष्पक्षता का महत्व तथा न्यायपालिका के मूल सिद्धांतों का विस्तार से परिचय कराया गया। बच्चों ने सौ. सलवेशकर महोदया से संवाद करते हुए अनेक प्रश्न पूछे और न्याय व्यवस्था के कई पहलुओं को समझा। सौ. सलवेशकर महोदया ने धैर्यपूर्वक सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया, जिससे बच्चों में न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान और समझ और भी प्रबल हुई।
इस कार्यक्रम में बार एसोसिएशन बल्लारपुर के अनेक वरिष्ठ एवं सम्मानित अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। उनमें अधिवक्ता आई. आर. सय्यद (अध्यक्ष), अधिवक्ता संजय बोराडे (सचिव), अधिवक्ता विकास गेडाम, अधिवक्ता अरविंद तितरे, अधिवक्ता खांके, अधिवक्ता लोह्ये, अधिवक्ता विधाते, अधिवक्ता हष्टे, अधिवक्ता पुसलवार सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता सम्मिलित थे। विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि अधिवक्ता आई. आर. सय्यद, अध्यक्ष बी.टी.बी.ए., मंच पर उपस्थित रहे और बच्चों को न्यायपालिका तथा अधिवक्ता समुदाय के महत्व के बारे में प्रेरक मार्गदर्शन दिया। उनकी उपस्थिति ने विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।
इसके पश्चात प्रश्न–उत्तर का खुला सत्र आयोजित किया गया, जिसमें तान्या, श्रेणीधी और सम्यंक ने विद्यार्थी–संवाददाता की भूमिका निभाते हुए न्यायालय अधिकारियों तथा अधिवक्ताओं से प्रश्न पूछे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक न्यायालय की दैनिक गतिविधियों, मामले की सुनवाई से जुड़े चरणों, निर्णय लेने की प्रक्रिया, न्यायाधीश की जिम्मेदारियों और न्याय व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रश्न–उत्तर सत्र ने विद्यार्थियों की सोचने की क्षमता और समझ को एक नया आयाम दिया।
कार्यक्रम के अंत में दिव्या ने हृदयपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन किया, जिसमें माननीय सौ. सलवेशकर महोदया, सभी न्यायालय अधिकारी, पुलिस कर्मचारी तथा बार एसोसिएशन के सभी सम्मानित अधिवक्ताओं के प्रति विद्यालय की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई। लगभग ग्यारह बजे कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। अनुमति मिलने पर विद्यार्थियों ने सामूहिक चित्र लिया और तत्पश्चात शांति एवं अनुशासन के साथ न्यायालय परिसर से प्रस्थान किया।
यह पूरा शैक्षणिक न्यायालय भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और जीवनपरक सिद्ध हुआ। विद्यालय प्रशासन का स्पष्ट मत है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस की सच्ची भावना—अर्थात रटने के बजाय करके सीखना—ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ही साकार हो सकती है। इस भ्रमण ने बच्चों में संविधान की समझ, न्याय व्यवस्था के प्रति संवेदनशीलता, समाज के प्रति दायित्व की भावना और एक जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा को अत्यंत मजबूती प्रदान की। विद्यालय का मानना है कि जब बच्चे वास्तविक दुनिया को समझते हैं, तभी उनमें प्रश्न पूछने, तर्क करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है, जो भविष्य के भारत के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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