उद्धव ठाकरे का यह मोर्चा राजनीतिक उद्देश्य से ही प्रेरित.!

धारावी पुनर्विकास समिति के अध्यक्ष रमाकांत गुप्ता का प्रतिपादन.!

मुंबई (जगदीश काशिकर) : शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे गुट के नेता उद्धव ठाकरे धारावी पुनर्विकास परियोजना का विरोध कर रहे हैं, लेकिन इस परियोजना से संबंधित नियम और शर्तें महाविकास अघाड़ी काल के दौरान तय की गई थीं. शिंदे-फडणवीस सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है.  इस परियोजना की टीडीआर को ठाकरे ने गुप्त रखा था. हालांकि,  इस सरकार ने इसे खोल दिया है, इसलिए ठाकरे की ओर से 16 दिसंवर को आयोजित किया जाने वाला मोर्चा केवल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है. इस मामले में उद्धव ठाकरे की केवल विरोध के लिए विरोध की नीति ठीक नहीं है.
धारावी पुनर्विकास समिति के अध्यक्ष और धारावी रक्षा आंदोलन के पूर्व अध्यक्ष रमाकांत गुप्ता ने धारावी के नागरिकों से ठाकरे के शिवसेना की इस साजिश को सामने लाया है. धारावी मुंबई का एक प्रभाग है. इस खंड में एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है. 557 एकड़ में फैला यह प्रभाग 1 मिलियन से अधिक बहुभाषी निवासियों का घर है. सरकारी सर्वे के मुताबिक यहां 57 हजार घर हैं. इन सभी घरों के पुनर्विकास 19 वर्ष से रुका हुआ है, लेकिन राज्य सरकार ने इस खंड के पुनर्विकास का ठेका गौतम अडानी के अडानी ग्रुप को देने का फैसला किया है.
इस फैसले के खिलाफ शिवसेना (उबाठा) समूह के पार्टी नेता उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने एक मोर्चा निकालने का निर्णय लिया है. आयोजन किया है. यह मोर्चा 16 दिसंबर को धारावी में अडानी के कंपनी कार्यालय पर निकाला जाएगा. इसी पृष्ठभूमि में 'स्प्राउट्स डिजिटल' के संपादक उन्मेष गुजराथी ने धारावी पुनर्विकास समिति के अध्यक्ष रमाकांत गुप्ता से खास बातचीत की. इस बातचीत में रमाकांत गुप्ता ने कहा कि शिवसेना की नीति धारावी के लोगों से लड़ने का एक तरीका है. गुप्ता के मुताबिक विशेष योजना के बिल्डर गौतम अडानी कई बार 'मातोश्री' पर उद्धव ठाकरे से मिल चुके हैं, इतना ही नहीं, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के भी अडानी से अंतरंग रिश्ते भी रहे हैं, इसीलिए उन्होंने ठाकरे की दोतरफा नीति की भी आलोचना की जा रही है.
महाविकास अघाड़ी में शरद पवार कैसे काम करते हैं?
गुप्ता ने उद्धव ठाकरे के दोहरेपन की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे इस समय महाराष्ट्र में 'महाविकास' और देश में 'भारत' के साथ हैं. इन दोनों गठबंधनों के नेता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार हैं. पवार अडानी के कट्टर समर्थक हैं, इतना ही नहीं, अडानी कई बार उनसे मिलने उनके मुंबई के सिल्वर ओक स्थित घर तथा बारमती भी जा चुके हैं. पवार के भतीजे विधायक रोहित पवार खुद अडानी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट जाते हैं, इतना ही नहीं, कभी-कभी तो वह खुद अडानी की कार भी मजे से चलाते हैं. एक समय तो पवार ने अहमदाबाद में अडानी के घर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी. इसको लेकर मीडिया में खबर भी जारी की गई है, इसके चलते सोशल मीडिया पर पवार परिवार को ट्रोल भी किया गया.
शरद पवार पर आपत्ति क्यों नहीं जताई?
गुप्ता ने स्पष्ट किया कि राज्य की महाविकास अघाड़ी में ठाकरे और शरद पवार प्रमुख हैं, इसलिए अडानी पर पवार के रुख को लेकर ठाकरे ने किसी भी तरह की कोई आपत्ति नहीं जताई. 24 जनवरी 2023 को अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के माध्यम से एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप में अनियमितताओं का साफ तौर पर जिक्र किया गया है, जिससे देश की संसद के साथ-साथ अडानी ग्रुप में भी काफी हलचल मची. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी के रिश्ते को लेकर सवाल उठाए गए.
इस संकट के दौरान शरद पवार अडानी के साथ मजबूती से खड़े रहे. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अडानी समूह को निशाना बनाया जा रहा है. इतना ही नहीं, अडानी समूह ने बिजली और अन्य क्षेत्रों में शानदार काम किया है, इसकी देश को जरूरत है, पवार ने उनका पुरजोर समर्थन किया था. अडानी को लेकर पवार के रुख पर कभी-भी उद्धव ठाकरे ने आपत्ति नहीं जताई है. दरअसल वे उनके साथ बैठना पसंद करते हैं.
धारावी पुनर्विकास परियोजना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए गुप्ता ने बताया कि पुनर्विकास का मुद्दा 1950 से चर्चा में आया, इसके बाद वर्ष 2004 में 'धारावी रेस्क्यू मूवमेंट' नामक एक सर्वदलीय संगठन की स्थापना की गई. इस समिति की अध्यक्षता मेरे पास आई, उस वक्त राज्य में कांग्रेस-राकांपा की सरकार थी. लेकिन उन्होंने धारावी के पुनर्विकास को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, इसके बाद 2014 में चुनाव हुए और महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना (फडणवीस और ठाकरे) की गठबंधन सरकार बनी.
बाद में, 2019 में, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और शरद पवार के मार्गदर्शन में महाविकास अघाड़ी सरकार का गठन किया गया, उस समय  इस पुनर्विकास के संबंध में कुछ नियम और शर्तें तय की गईं और वे नियम और शर्तें अभी-भी लागू हैं.  
गुप्ता ने यह भी बताया कि धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) ने धारावी के लोगों की प्रगति पर ब्रेक लगा दिया है. वर्ष 2004 में 'धारावी रेस्क्यू मूवमेंट' की स्थापना हुई, जिसमें भाजपा, शिवसेना, जनता दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य दलों के कार्यकर्ता नेता शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस इस समिति में कभी शामिल नहीं हुई. दिवंगत विधायक एकनाथ गायकवाड़ लगातार दो बार धारावी के सांसद और तीन बार विधायक रहे. वे दो बार राज्य के कैबिनेट मंत्री भी रहे, उनके कार्यकाल के दौरान धारावी पुनर्विकास योजना (डीआरपी) को मंजूरी दी गई थी, यदि यह मंजूरी नहीं दी गई होती, तो स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) के माध्यम से धारावी का विकास कभी नहीं हो पाता.
जाग गईं वर्षा गायकवाड़ -
गायकवाड़ की सुपुत्री वर्षा गायकवाड़ 2004, 2009, 2014 और 2019 में लगातार चार बार धारावी निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गई हैं, लेकिन वे इस संबंध में कभी-भी आंदोलन में शामिल नहीं हुईं, इतना ही नहीं, ये धारावी बचाओ आंदोलन के साधारण सदस्य भी नहीं रहीं, इतना ही नहीं, कुछ दिन पहले वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में धारावी के 4 कांग्रेस पार्षद हाल ही में शिंदे गुट से शिवसेना में शामिल हुए हैं, इसके अलावा गुप्ता ने 'स्प्राउट्स' से बात करते हुए आलोचना की कि चुनाव नजदीक आते ही गायकवाड़ को अचानक धारावी के पुनर्विकास की चिंता सताने लगी है.
शिवशाही काल में 'एसआरए' योजना आई और मुंबई के विकास को नया आयाम मिला, जब क्षेत्रिय बस्तियां उभरने लगीं तो एशिया की सबसे बड़ी धारावी ने भी विकास का सपना देखा, लेकिन तत्कालीन सांसद एकनाथ गायकवाड़ को इस तरह के टुकड़ों-टुकड़ों में होने वाले विकास में कोई दिलचस्पी नहीं थी और उन्हें व्यापक  विकास की उम्मीद थी, इसलिए उन्होंने 'डीआरपी' (धारावी पुनर्विकास परियोजना) को अस्तित्व में लाया और सरकार बदलने के बाद विलासराव देशमुख से इसकी मंजूरी ले ली. 
वर्ष 2004. बाद में उनकी ही पार्टी के पृथ्वीराज चव्हाण ने इस योजना का विरोध किया. उन्होंने कहा कि 'एकनाथ गायकवाड़ तथा वर्षा गायकवाड जैसे लोग धारावी को बेचना चाहते हैं' इस सारी उलझन में डीआरपी योजना भी अटक गई और धारावी का विकास भी अधर में लटक गया.
'डीआरपी' के प्रस्ताव के कारण 'एसआरए' परियोजनाओं को मंजूरी नहीं मिली. 'स्प्राउट्स' को बताया गया है कि धारावी की हालत ऐसी हो गई है कि मां को खाने की इजाजत नहीं है और पिता को भीख मांगने की अनुमति नहीं है, जैसी हो गई है. अब भाजपा सत्ता में आई और 'डीआरपी' को मौका मिला, लेकिन फिर राजनीतिक पसंद भी बदल गई. यह ठेका अडानी को दिया गया और एक नया चक्र शुरू हुआ है. 'डीआरपी' का प्रस्ताव रखने वाले एकनाथ गायकवाड़ की बेटी आज 'डीआरपी' का विरोध कर रही हैं. वर्षा गायकवाड़, जिन्होंने धारावी के विकास के मुद्दे पर कभी एक भी बैठक नहीं की, अडानी का विरोध करने की अपनी योजना के खिलाफ ही आवाज बुलंद कर रही हैं. 
कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि जिन्होंने इस योजना की नींव रखी, वे ही अब इसका विरोध कर दोहरी नीति अपना रहे हैं. वर्षा गायकवाड की इस परियोजना को लेकर बरती जा रही नीति ठीक नहीं है,इस मुद्दे को लेकर वर्षा गायकवाड की जितनी निंदा की जाए वह कम ही होगी, दूसरी ओर इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की दोहरी नीति के बारे में इतना ही कहना उचित होगा कि उद्धव ठाकरे मजबूरी में इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं. उन्हें केंद्र की मोदी सरकार का विरोध करना है, इसलिए वे अडानी के माध्यम से बनाई जा रही इस योजना का विरोध करने के लिए मजबूर है और इसी मजबूरी को कारण उद्धव ठाकरे को धारावी पुनर्विकास योजना के लिए दोहरी नीति अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.  

सरकारी नोकरभरती व पेपरफुटी गैरव्यवहार रोखण्यासाठी सरकारने नेमलेल्या समितीत विद्यार्थी व संघटनांचे प्रतिनिधीं घ्यावेत- धनंजय शिंदे, उपाध्यक्ष, आम आदमी पार्टी

नोकरभरतीमध्ये झालेले घोटाळे पुराव्यासहित सरकारकडे उपलब्ध असताना संधीसाधू "शिंदे पवार फडणवीस" सरकारने उशीर का लावला?


मुंबई : राज्यात सरकारी नोकर भरती परीक्षेदरम्यान सातत्याने होत असलेली पेपरफुटी, तसेच घोटाळे या विरुद्ध आम आदमी पक्ष व स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिती यांच्या वतीने सप्टेंबर २०२३ महिन्यात जनहित याचिका दाखल करण्यात आली होती. या याचिकेची पहिली सुनावणी ६ डिसेंबर २०२३ रोजी होऊन न्यायालय पुढील सुनावणी १० जानेवारी, २०२३ रोजी करणार आहे.
या दरम्यानच्या काळातही अनेक पेपरफुटीची प्रकरणे बाहेर आली आहेत. अनेक विद्यार्थी, नेते व संघटना यांनी याबाबत आवाज उठविला आहे. ३ दिवसांपूर्वीच देवेन्द्रजी फडणवीस मुख्यमंत्री असताना "२०१७ ते २०१९" या काळातील महापरीक्षा पोर्टल घोटाळ्याचा PWC ने बनविलेला गोपनीय अहवाल समाज माध्यमांवर उपलब्ध झाल्यामुळे भाजपा सरकारची पुरती बेअब्रू झाली आहे. गेल्या ४ वर्षांपासून विविध विद्यार्थी संघटना व आम आदमी पार्टी पेपरफुटीबाबत सरकारशी पत्रव्यवहार करत आहोत, विविध संविधानिक मार्गाने प्रयत्न करत आहेत. 
या सर्व पार्श्वभूमीवर राज्य सरकारला आज जाग येऊन आज विधिमंडळाच्या हिवाळी अधिवेशनात स्पर्धा परीक्षेतील पेपरफुटी रोखण्यासाठी राज्य शासनाने समिती स्थापन केली आहे. या निर्णयाचे स्वागत आहे. या समितीचे अध्यक्ष व सदस्य यांना MPSC च्या कामाचा अनुभव आहे. परंतु २०१७ पासून आज पर्यंत नोकरभरतीमध्ये झालेले घोटाळे पुराव्यासहित सरकारकडे उपलब्ध असताना संधीसाधू "शिंदे पवार फडणवीस" सरकारने उशीर का लावला याचे उत्तर प्रामाणिकपणे अभ्यास करणाऱ्या राज्यातील लाखो विद्यार्थी - विद्यार्थिनींना मिळायला हवं. 
महायुती सरकारने या समितीला दिलेला ३ महिन्याचा वेळ खूप जास्त आहे. तसेच समिती सदस्य अनुभवी असल्यामुळे हा कालावधी कमी करून ३ आठवड्याच्या मुदतीमध्ये समिती सहजपणे अहवाल तयार करू शकते त्यामुळे कालावधी कमी करण्यात येऊन या समितीमध्ये सरकारी नोकरभरतीमधील पेपरफुटी व भ्रष्टाचाराच्या विरोधात काम करणाऱ्या विद्यार्थी व संघटनांच्या २ प्रतिनिधींचा अंतर्भाव केल्यास अधिक परिपूर्णता येईल.
"स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिती" सारख्या नोंदणीकृत विद्यार्थी संघटनेने आतापर्यंत पुढील नोकर भरती घोटाळे उघड केले आहेत :

- महापरीक्षा पोर्टल घोटाळा (२०१७-२०)
- TET घोटाळा
- आरोग्य भरती पेपरफुटी (२०२१)
- म्हाडा पेपरफुटी (२०२१)
- मुंबई पोलीस पेपरफुटी (२०२३)
- तलाठी भरती पेपरफुटी (२०२३)
- वन विभाग पेपरफुटी (२०२३)

यापैकी जवळ-जवळ सर्व पेपरफुटीमध्ये स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिती च्या अधिकृत तक्रारी नंतर घोटाळे उघड झाले आहेत. पुणे सायबर पोलीस, मुंबई पोलीस आणि इतर अनेक ठिकाणांच्या पोलीस आणि प्रशासकीय अधिकाऱ्यांसोबत मिळून समन्वय समितीने घोटाळे उघड केले आहेत. पेपरफुटी आणि या गुन्ह्यांबद्दल त्यांना सखोल माहिती आहे. 

आम आदमी पार्टी सरकारकडे पुढील मागण्या करीत आहे.

१. या समितीत स्पर्धा परीक्षा समन्वय समितीचा प्रतिनिधी, इतर विद्यार्थी प्रतिनिधी किंवा तज्ञाला सुद्धा समितीत सामील करावे. पेपरफुटी कायदा, परीक्षेसाठी योग्य उपायोजना अशा सर्व अपेक्षा पूर्ण होण्यासाठी विद्यार्थांचा प्रतिनिधी समितीत असणे गरजेचे आहे. 
२. समितीने तज्ञ व्यक्ती, सर्वसामान्य उमेदवार, नागरिक यांची मते आणि सूचना विचारात घेण्यासाठी यासाठी ई-मेल किंवा खुली चर्चा ई. उपाय करावेत. 
राज्यातील लाखो विद्यार्थी, सामाजिक/राजकीय संघटनांच्या सामूहिक प्रयत्नांमुळे आज विधिमंडळात सरकारला हा निर्णय घ्यावा लागला. सर्वांचे अभिनंदन. परंतु सर्वसमावेशक समिती बनवून ३ आठवड्यांत समितीचा अहवाल सरकारकडे जमा झाल्यास "प्रामाणिकपणे अभ्यास करून सरकारी नोकरीचे स्वप्न बघणाऱ्या राज्यातील लाखो तरुण तरुणींना न्याय मिळेल. सरकारने ठरवलं तर हे शक्य आहे अन्यथा इतर सरकारी समित्यांच्या प्रमाणेच हि समिती सुद्धा वेळखाऊ ठरून विद्यार्थ्यांचे नुकसान होऊ नये हि अपेक्षा स्पर्धा परीक्षा समन्वय समितीसोबत मा. उच्च न्यायालयात याचिका दाखल केलेले मा. धनंजय रामकृष्ण शिंदे (राज्य उपाध्यक्ष - आम आदमी पार्टी महाराष्ट्र) यांनी केली.

पुढचे श्रद्धा वालकर प्रकरण होण्यापूर्वी ‘लव्ह जिहादविरोधी कायदा’ करावा ! - समस्त हिंदुत्वनिष्ठ संघटनांची शासनाकडे मागणी

'लव्ह जिहादविरोधी कायद्या’विषयी शासन अत्यंत गंभीर; लवकरच निर्णय! - मुख्यमंत्री एकनाथजी शिंदे यांचे आश्वासन

नागपुर (जगदीश काशिकर) : ‘लव्ह जिहादविरोधी कायदा’ करण्याविषयी शासन अत्यंत गंभीर आहे. कायद्यासंदर्भात राज्य शासनाने बर्‍याच गोष्टी केलेल्या आहेत. लवकरच या संदर्भात तुम्हाला निर्णय समजेल, असे स्पष्ट आश्वासन महाराष्ट्र राज्याचे मुख्यमंत्री मा. एकनाथजी शिंदे यांनी दिले. ते ‘लव्ह जिहाद’च्या विरोधात महाराष्ट्रभरात काढण्यात आलेल्या विविध मोर्च्याच्या प्रतिनिधींसोबत आयोजित बैठकीत बोलत होते. या वेळी मुख्यमंत्र्यांसह राज्याचे ग्रामविकासमंत्री श्री. गिरीश महाजन, मदत व पुनर्वसन मंत्री श्री. संजय राठोड, शिवसेनेचे मुख्य प्रतोद आमदार श्री. भरतशेठ गोगावले आणि आमदार श्री. प्रताप सरनाईक हेही उपस्थित होते.
हिंदू संघटनांच्या वतीने शिष्टमंडळामध्ये ‘हिंदु जनजागृती समिती’, ‘श्रीशिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान’, ‘सकल हिंदू समाज’, ‘विश्व हिंदु परिषद’, ‘बजरंग दल’, ‘हिंदु विधीज्ञ परिषद’, ‘सनातन संस्था’, ‘संकल्प हिंदु राष्ट्र अभियान’, ‘अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ’, ‘राष्ट्रीय युवा गठबंधन’, ‘सर्वभाषीक बाह्मण महासंघ’, ‘चित्पावन ब्राह्मण महासंघ’ आदी विविध संघटनांचे राज्यभरातील मान्यवर सहभागी झाले होते. त्यात प्रामुख्याने अधिवक्ता वैशाली परांजपे, स्नेहल जोशी, सर्वश्री सुनील घनवट, शंकर देशमुख, पराग फडणीस, कमलेश कटारिया, नितीन वाटकर, धनंजय गायकवाड, कैलास देशमुख, सागर देशमुख, आशिष सुंठवाल, गौरव बैताडे, रवी ग्यानचंदानी, उमाकांतजी रानडे, राहुल पांडे, श्रीकांत पिसोळकर, अभिजीत पोलके आणि करण थोटे यांचा समावेश होता.
या वेळी हिंदु जनजागृती समितीचे राज्य संघटक श्री. सुनील घनवट म्हणाले की, महाराष्ट्रात ‘लव्ह जिहाद’च्या विरोधात प्रत्येक जिल्ह्यांत, तालुक्यांत आणि शहारांत लाखोंच्या संख्येने 50 हून अधिक मोर्चे काढण्यात आले होते. त्यावर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आणि उपमुख्यमंत्री अन् गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी महाराष्ट्रातही ‘लव्ह जिहाद’च्या विरोधात कठोर कायदा करण्यात येईल, असे आश्वासन दिले होते; मात्र आता एक वर्ष उलटून गेले आहे. तरी लव्ह जिहादविरोधी कायदा झालेला नाही. मात्र देशातील उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात आदी राज्यांनी ‘लव्ह जिहाद’च्या विरोधात कायदा केला आहे. महाराष्ट्रातही लवकर कायदा व्हावा, अशी मागणी शिष्टमंडळाची मागणी आहे.
या वेळी शासनाची भूमिका स्पष्ट करतांना मुख्यमंत्री श्री. शिंदे म्हणाले की, सरकार कोणत्या विचारांचे आहे, हे तुम्हाला माहिती आहे. त्यामुळे लव्ह जिहादसंदर्भात राज्य सरकारने एक-एक करून निर्णय घ्यायला प्रारंभ केला आहे. शासनाची भूमिका काय आहे, हे आम्ही प्रतापगडावरील कृतीने दाखवून दिले आहे. त्यामुळे शासन तुमच्या भूमिकेशी पूर्णपणे सहमत आहे. कायद्याविषयी शासनाने काय केले, यासाठी मुंबईला एक ठराविक लोकांची बैठक ठेवून त्यामध्ये तुम्हाला माहिती दिली जाईल.

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