भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण का संदेश देती है फिल्म गब्बर इज बैक .. युवा पीढ़ी और हर वर्ग के लिए सबक - अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की अपील .!
बल्लारपुर (संपादकीय) :
Gabbar Is Back केवल एक मनोरंजन फिल्म नहीं, बल्कि आज की ज्वलंत सामाजिक समस्याओं पर करारा प्रहार करने वाली कृति के रूप में सामने आती है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस प्रकार भ्रष्टाचार, लचर प्रशासनिक व्यवस्था और रूढ़िगत कुप्रथाएं धीरे-धीरे समाज को भीतर से खोखला कर रही हैं।
वर्तमान समय में देश, राज्य ही नहीं बल्कि शहर और गांव स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें फैलती जा रही हैं। आम नागरिक को न्याय पाने के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में यह फिल्म युवाओं सहित हर वर्गीय पीढ़ी को यह संदेश देती है कि अन्याय के खिलाफ चुप रहना भी एक प्रकार का अपराध है।
फिल्म की कथा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्ट अधिकारियों और तंत्र की पोल खोलते हुए यह दर्शाती है कि यदि समाज संगठित होकर आवाज उठाए, तो बदलाव संभव है। शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण कार्य या अन्य शासकीय विभागों में फैली अनियमितताओं पर प्रहार करते हुए फिल्म जागरूक नागरिक बनने का आह्वान करती है।
सामाजिक चिंतकों का मानना है कि आज देश को भयमुक्त और सुंदर बनाने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना समय की मांग बन चुकी है। यदि समाज एकजुट होकर गलत नीतियों और कुप्रथाओं के विरुद्ध खड़ा हो जाए, तो व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
फिल्म का संदेश स्पष्ट है - जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। जब तक आम नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत नहीं होगा, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं। अतः युवाओं से लेकर प्रत्येक नागरिक को चाहिए कि वह न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी की स्थापना के लिए आगे आए।
इसी जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही देश, राज्य और स्थानीय स्तर पर सुशासन की नींव मजबूत की जा सकती है।

